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राजस्व अधिकारियों की हड़ताल शुरू: तहसीलदार-नायब तहसीलदारों ने न्यायिक-गैर न्यायिक कार्य विभाजन का किया विरोध, कोठी महल कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे अधिकारी!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
जिले के राजस्व तंत्र में गुरुवार को बड़ा व्यवधान देखने को मिला जब तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने शासन के हालिया आदेश के विरोध में सामूहिक कार्य बहिष्कार और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। कोठी महल कार्यालय परिसर में जुटे अधिकारी शासन द्वारा न्यायिक और गैर-न्यायिक कार्यों के बंटवारे को “मानव संसाधन का दुरुपयोग” बता रहे हैं और इसे तत्काल निरस्त करने की मांग पर अड़े हुए हैं।
डोंगल और सरकारी वाहन लौटाकर दी थी चेतावनी, अब हड़ताल शुरू
बुधवार को ही सभी राजस्व अधिकारियों ने डिजिटल हस्ताक्षर वाले डोंगल और सरकारी वाहन प्रशासन को सौंप दिए थे और चेताया था कि यदि आदेश वापस नहीं लिया गया, तो वे गुरुवार से सभी कार्यों का बहिष्कार करेंगे। वादा के अनुसार, गुरुवार को अधिकारियों ने ना सिर्फ काम बंद किया, बल्कि सार्वजनिक रूप से विरोध जताते हुए धरने पर बैठ गए।
“एक ही संवर्ग, दो जिम्मेदारियां – यह व्यवस्था नहीं चलेगी”: अधिकारी संघ
राजस्व अधिकारी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की जिला इकाई इस आंदोलन का नेतृत्व कर रही है। संघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष नवीन कुंभकार ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि,
“शासन की योजना के तहत तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों को दो वर्गों में बांट दिया गया है – एक समूह को केवल न्यायालयीन प्रकरणों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि दूसरा समूह फील्ड में जाकर गैर-न्यायिक कार्य जैसे कि प्रोटोकॉल ड्यूटी, पंचनामा, कथन लेना और अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाएगा।”
कुंभकार का आरोप है कि यह योजना अधिकारियों को प्रोटोकॉल ड्यूटी में उलझाने और राजस्व न्यायालयीन व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका मानना है कि इससे न केवल अधिकारियों के कौशल और योग्यता का दुरुपयोग होगा, बल्कि एक ही संवर्ग के भीतर भेदभाव भी बढ़ेगा।
प्रभाव व्यापक: राजस्व प्रकरणों की सुनवाई से लेकर प्रमाण-पत्रों तक सबकुछ प्रभावित
शासन के आदेश के तहत, आधे अधिकारियों को कोर्ट में बैठने और आधों को फील्ड में भेजने का निर्णय लिया गया है। जिले में इस समय 32 राजस्व अधिकारी (तहसीलदार व नायब तहसीलदार) कार्यरत हैं, जो 28 तहसील न्यायालयों में प्रतिदिन लगभग 1200 से 1400 राजस्व मामलों की सुनवाई करते हैं। अब उनके हड़ताल पर चले जाने से सिर्फ न्यायालयीन कार्य ही नहीं, बल्कि जाति, निवास, आय प्रमाण पत्र जारी करने जैसे जरूरी कार्यों के साथ-साथ कानून व्यवस्था से जुड़े मौके पर पहुंचने वाले अधिकारी भी उपलब्ध नहीं होंगे।
आदेश पर पहले भी उठे थे सवाल, दिया गया था ज्ञापन
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि इस निर्णय के खिलाफ पहले भी राजस्व मंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जा चुका है, लेकिन शासन स्तर से अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया। अधिकारी साफ कर चुके हैं कि जब तक इस आदेश को वापस नहीं लिया जाता, विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा और सभी प्रशासनिक कार्यों से वे पूर्ण रूप से विरक्त रहेंगे।
प्रशासन की चिंता बढ़ी, जनता बेहाल
एक ओर अधिकारी अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन के सामने कानून व्यवस्था, राजस्व मामलों और प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया को सुचारु रखने की चुनौती है। साथ ही आमजन को भी अब अपने जरूरी कार्यों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है।
यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो इसके असर ब्लॉक स्तर से लेकर जिला मुख्यालय तक महसूस किए जाएंगे। अब देखना होगा कि शासन इस संकट का समाधान निकालने के लिए संवाद की पहल करता है या नहीं।